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Urs-e-Makhdoom Ashraf: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने किछौछा शरीफ दरगाह पर भेजी अकीदत की चादर

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Alam Ki Khabar: उर्स-ए-मखदूम अशरफ के मौके पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी की ओर से किछौछा शरीफ दरगाह में चादर पेश की गई। देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई।

पटना/अंबेडकर नगर, 14 जुलाई। आलम की खबर:उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर स्थित विश्वविख्यात किछौछा शरीफ दरगाह में आयोजित हजरत सुल्तान मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी की ओर से अकीदत की चादर भेजी गई। दरगाह में चादर पेश कर मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए विशेष दुआ की गई। इस मौके पर मौजूद लोगों ने सूफी संतों की शिक्षाओं को समाज में प्रेम, इंसानियत और आपसी सौहार्द का मजबूत आधार बताया।

बताया गया कि उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी लंबे समय से सूफी परंपरा और उसकी साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करते रहे हैं। उनका मानना है कि सूफी संतों की शिक्षाएं समाज में प्रेम, सहिष्णुता, सेवा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश देती हैं। यही वजह है कि उन्होंने उर्स के अवसर पर अपनी ओर से चादर भेजकर श्रद्धा व्यक्त की।

हजरत सुल्तान मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह भारतीय उपमहाद्वीप के प्रमुख सूफी संतों में माने जाते हैं। उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और उत्तर प्रदेश के किछौछा को अपनी कर्मभूमि बनाया। उनकी शिक्षाओं से प्रेरित अशरफिया सिलसिले ने प्रेम, करुणा, सेवा और मानवता के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाया।

किछौछा शरीफ दरगाह आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले लाखों जायरीन की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष आयोजित होने वाले उर्स में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और देश-दुनिया में शांति, सद्भाव तथा खुशहाली की दुआ करते हैं। इस वर्ष भी उर्स में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों की मौजूदगी रही।

उपमुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई चादर को सूफी परंपरा, गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सद्भाव के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बिहार अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मौलाना उमर नूरानी, अताउर्रहमान, महताब आलम और फैजुल कादरी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सूफी परंपरा का संदेश आज भी प्रासंगिक

सूफी संतों की शिक्षाएं सदियों से प्रेम, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देती रही हैं। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में विभिन्न समुदायों की भागीदारी भारत की साझा विरासत और सामाजिक एकता को मजबूत करती है। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी समाज में सद्भाव और सौहार्द के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती है।

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